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आपका अहसान हम मानते हैं

Shivcharan Dass

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लबों पे रुक गई उस बात को हम जानते हैं
        
                                                    
                            
शुक्रिया है आपका अहसान हम मानते हैं
कोई भी अपना नहीं इस भरी महफिल में है
आप हैं सबसे जुदा हम तो ये ही जानते हैं
अब हमारा नाम भी जब अजनबी है शहर में
एक घर ऐसा भी है जिसमे हमको चाहते हैं
आपका अंदाजे बयां दिल को करता है मुरीद
ये तुम्हारी शायरी बेहतर सभी से मानते हैं
कर दिया है गहरा जादू इश्क ने सब पे दास
जो हमारा कातिल है उसको रहबर मानते हैं।
2 वर्ष पहले
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