इतनी बेरहम भी क्यों है वो,
जो मुझपे ज़रा भी रहम नहीं करती।
मैं तो करता हूँ बहुत,
मगर वो ज़रा भी क्यों नहीं करती।
मैं तो यादों के सहारे उसकी, ज़िन्दगी गुज़ार रहा हूँ,
पर वो मुझे देखकर भी क्यों नहीं देख रही।
माना कमी होगी मुझमें लाखों, शायद वजह रही होगी ये मुझे ना चाहने की,
या फिर चाहत ही उसकी कोई और है।
मगर फिर भी यह बताकर ही मुझसे कुछ,
वो बात तो करती।
मैं तो करता हूँ बहुत, मगर वो ज़रा भी क्यों नहीं करती।
ज़िन्दगी में उसकी कोई और होगा,
लेकिन मेरी हर धड़कन पर नाम बस उसका होगा।
वो ना समझे मेरे प्यार को, मेरे अश्कों की बरसात को,
मेरी हर घड़ी उसको याद करने की रात को।
पर मैं करूँगा बस ये इश्क़ उसी से,
वो मुझे करने से ऐसा रोक नहीं सकती।
ना करती होगी वो मुझसे ज़रा भी मोहब्बत,
पर मेरे प्यार का नाम वो सिर्फ़ होगी।
उसके अलावा कोई दूसरी नहीं होगी।
मैं तो करता हूँ बहुत, मगर वो ज़रा भी क्यों नहीं करती।