जिस माटी में जन्म लिया है
उस माटी का हूं रखवाला
जीत हार की परवा किए बिना
मुझे देश के लिए लड़ना है
देश के लिए जीना है
देश के लिए मरना है।
अपने खून से ही
क्यों ना नहाना पड़े
पर देश का झण्डा लहराना है
देश ही शान मेरी
देश ही है ईमान मेरा।
इस देश की मिट्टी में
अपना पन मुझे लगता है
इस देश के लिए
कुरबानी देने पर भी
डर नहीं लगता है।।
- शिवानी बजाज
हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।