विज्ञापन

भारत की कहानी: एक "रियलिस्टि" की ज़ुबानी

Shivangi Verma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अरे सुनो!
        
                                                    
                            
बजट की स्पीच आई है नई,
लेकिन पुरानी चली है बात,
टैक्स भरने में तनख़्वाह गई,
मिडिल क्लास के बुरे हालात।

सड़कों में गड्ढे भरे हैं,
नालों का वह मैला पानी,
पॉल्यूशन में सब मरे हैं,
भारत की सुनो कहानी।

आवाज़ उठाओ तो सलाखों के पीछे,
सच बोलने पर मारे जाओगे,
जीवन धर्म-जात से नीचे,
गरीब तुम दुख अपने किसे सुनाओगे?

सबसे बड़ा मज़ाक शिक्षा है,
सरकारी स्कूल उसके नमूने,
स्वास्थ्य के नाम पर मिली भिक्षा है,
आख़िर कब तक यह देश सहे?

और अगर, सियासत के पन्ने पलटो,
तो जानोगे, झूठ की स्याही से लिखी किताब है,
यहाँ हर एक सच्चा सड़कों पर
और हर एक चोर नवाब है।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all