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शायद ! इसीलिए ममता की देवी है कहलाती।

Shivangi Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब मैं हुआ अलग उस दिन
        
                                                    
                            
आँसुओं से भरा था मेरा नयन,
आँसुओं से याद आती है
लक्ष्य में बाधा यह दिखती है ,
उसने लक्ष्य को सारथी बताया
लक्ष्य पाने में ममता को भूल आया ।

आशीर्वाद में आयु है, देती
क्या वह है ममता की देवी ,
जब मैं छात्रवास को किया गमन
उसकी आंखों में थे आशुओं से भरे ग़म ,
आशुओं को देख आसुए है छलकी
क्या उस दिन नभ में बिजली भी चमकी ।

शरारतों पर डाटा बहुत मुझे है
क्या आज बदले में अलग हों जाऊ उससे मैं,
जब मैं आँखों से हुआ ओझल
क्या रुक गये होंगे वो आंखों के गंगाजल ।

ख्याल रखने वाले बहुत मिले
पर उससा न कोई मिला ,
जब भी खाने को बैठती
उसे अपने प्यारे की याद आती ,
क्या प्यारे को भी वह याद आती
शायद ! इसीलिए ममता की देवी है कहलाती।
13 घंटे पहले
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