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शायद ! इसीलिए ममता की देवी है कहलाती।

                
                                                         
                            जब मैं हुआ अलग उस दिन
                                                                 
                            
आँसुओं से भरा था मेरा नयन,
आँसुओं से याद आती है
लक्ष्य में बाधा यह दिखती है ,
उसने लक्ष्य को सारथी बताया
लक्ष्य पाने में ममता को भूल आया ।

आशीर्वाद में आयु है, देती
क्या वह है ममता की देवी ,
जब मैं छात्रवास को किया गमन
उसकी आंखों में थे आशुओं से भरे ग़म ,
आशुओं को देख आसुए है छलकी
क्या उस दिन नभ में बिजली भी चमकी ।

शरारतों पर डाटा बहुत मुझे है
क्या आज बदले में अलग हों जाऊ उससे मैं,
जब मैं आँखों से हुआ ओझल
क्या रुक गये होंगे वो आंखों के गंगाजल ।

ख्याल रखने वाले बहुत मिले
पर उससा न कोई मिला ,
जब भी खाने को बैठती
उसे अपने प्यारे की याद आती ,
क्या प्यारे को भी वह याद आती
शायद ! इसीलिए ममता की देवी है कहलाती।
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52 मिनट पहले

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