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परिपाटी और हम

Shivadatta Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज तुम्हारे जन्मदिवस पर
        
                                                    
                            
हम ना याद
तुम्हे अब आयें

मेरा आशीर्वाद तुम्हे है
तेरी ध्वजा सदा फहराये
सदा रहो सुख स्वस्थ समृद्ध हो
जीवन मे दुःख कभी न आए
मेरे लाल
सदा संयम मे रहना
सहना बात बड़ों की
तर्क कुतर्क कभी ना करना
लेना आशीर्वाद सभी की
परिपाटी अपनी ना छूटे
और
कभी अपने ना रूठें
रूठ जायँ तो उन्हें मनाना
कभी न कोई शान दिखाना

धर्मधवजा की शान न कम हो
निज कुल गौरव से ही हम हों

छोटों की चिंता तुम करना
और बड़ों की पूजा
सबसे बड़ा तो धर्म यही है
और न कोई दूजा
राष्ट्र प्रथम हो
औ फिर हम हों
यही मंत्र और पूजा.
2 महीने पहले
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