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परिपाटी और हम

                
                                                         
                            आज तुम्हारे जन्मदिवस पर
                                                                 
                            
हम ना याद
तुम्हे अब आयें

मेरा आशीर्वाद तुम्हे है
तेरी ध्वजा सदा फहराये
सदा रहो सुख स्वस्थ समृद्ध हो
जीवन मे दुःख कभी न आए
मेरे लाल
सदा संयम मे रहना
सहना बात बड़ों की
तर्क कुतर्क कभी ना करना
लेना आशीर्वाद सभी की
परिपाटी अपनी ना छूटे
और
कभी अपने ना रूठें
रूठ जायँ तो उन्हें मनाना
कभी न कोई शान दिखाना

धर्मधवजा की शान न कम हो
निज कुल गौरव से ही हम हों

छोटों की चिंता तुम करना
और बड़ों की पूजा
सबसे बड़ा तो धर्म यही है
और न कोई दूजा
राष्ट्र प्रथम हो
औ फिर हम हों
यही मंत्र और पूजा.
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2 महीने पहले

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