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माँ : ममता का अनंत तीर्थस्थल

shikha pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब जीवन पथ संकटों से घिरा
        
                                                    
                            
मन आशाओं से रिक्त हो चला
अंधकार जब गहन हो उठा
तब माँ
तेरे स्नेह का दीपक मार्गदर्शक बन गया।

हृदय की पीड़ा
तेरे आँचल में शांति पाती है
तेरे स्पर्श की शीतलता
अग्नि-तुल्य विषाद को भी निस्तेज कर देती है

माँ —
तू केवल जननी नहीं
धरती की कोख से निकली
ईश्वरीय करुणा का मूर्त रूप है
तेरी गोद वह तीर्थ है
जहाँ शरण पाकर आत्मा निर्मल हो उठती है।

तेरी वाणी में गूँजता है आशीर्वाद
तेरी आँखों में झलकता है दैवीय विश्वास
तू ही वह शक्ति है
जो संतप्त जीवन को सहनशीलता का वरदान देती है

हे जननी
तू वह मंदिर है
जहां बिना प्रार्थना के वरदान मिलता है
तेरी ही ममता से
यह जगत् सुवासित है

तू ही है
सृष्टि का आधार
करुणा का शाश्वत स्त्रोत
और प्रेम का अनंत प्रकाश।
 
एक वर्ष पहले
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