विज्ञापन

वो ख़ुद ही जाने!

Shelendra Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काऊ  घर होवे सौ सौ हाथी
        
                                                    
                            
काऊ के एक बुकरिया नाई
काऊ दरवाजे सौ सौ गाड़ी
काऊ के  साइकिलया नाई
काऊ  के ठाडे मेल दोमेल
काऊ के एक मड़ैया नाई
काऊ के आंगन दो दो पूत
काऊ के एक बिटरिया नाई
काऊ के खेलें सौ सौ नाती
काऊ के कोई  रुबाइयां नाई
काऊ के चलवे तोप बंदूक
काऊ के एक फुकनिया नाई
जैसे बाँटे वो खुद ही जाने
हलदौना कोई पूछिया नाई

- शैलेंद्र शुक्ला"हलदौना"
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all