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जिंदा क़फ़न

Shelendra Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो मरता हूँ तो मुझे आज ही मर जाने दो
        
                                                    
                            
ये मुझे रोज रोज जिंदा क़फ़न ना पहनाओ।
मेरी आज़ादी को तमाशा तुम ना बनने दो
मुझको खोखले समाज की जंजीर न पहनाओ।
मेरे पंखों की ताकत मुझको पता हो जाने दो
मेरी स्वछंद उड़ान पर प्रतिबंध ना लगवाओ।
जो मुझको सताया है तो मुझको रो तो लेने दो
मेरे आँसुओं से कोई समझोता तो ना करवाओ।
जो मरता हूँ तो मुझे आज ही मर जाने दो
ये मुझे रोज रोज जिंदा क़फ़न ना पहनाओ।


शैलेंद्र शुक्ला " हलदौना"
ग्रेटर नोएडा
 
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