मत करो तकरार हरदम,
घटेगा सत्कार हम-दम,
तुम सियासतदां नहीं हो,
ना तेरी सरकार हम-दम,
प्रेम से दिल जीत सकते,
है दुःखी संसार हम-दम,
भुला दो रंजिश न मुंह से,
करो तुम इज़हार हम-दम,
बंद कर दो दख़लंदाज़ी,
ये नहीं स्वीकार हम-दम,
ध्यान में मन को लगाओ,
तभी है उद्धार हम-दम,
फ़लसफ़ा गुंजन यही अब,
करो ख़ुद से प्यार हम-दम,
--शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'