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करो ख़ुद से प्यार हम-दम

                
                                                         
                            मत करो तकरार हरदम,
                                                                 
                            
घटेगा सत्कार हम-दम,

तुम सियासतदां नहीं हो,
ना तेरी सरकार हम-दम,

प्रेम से दिल जीत सकते,
है दुःखी संसार हम-दम,

भुला दो रंजिश न मुंह से,
करो तुम इज़हार हम-दम,

बंद कर दो दख़लंदाज़ी,
ये नहीं स्वीकार हम-दम,

ध्यान में मन को लगाओ,
तभी है उद्धार हम-दम,

फ़लसफ़ा गुंजन यही अब,
करो ख़ुद से प्यार हम-दम,
--शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
50 मिनट पहले

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