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घड़ी की सुईयां

Shashank Priya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घड़ी की सुइयों के साथ
        
                                                    
                            
जब मस्तिष्क थकती है
परीक्षा कक्ष की बातें फिर
आँखों में क्यों जगती है
तीन घंटे का इक सफर
ज्ञान का कुछ ताना-बाना
लगता है जैसे अल्प समय में
है एक नया शहर बसाना
-शशांक प्रिय मिश्र
 
3 महीने पहले
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