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ममतामयी मां

Shashank Misra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ममतामयी मां
        
                                                    
                            
सृष्टि का प्रथम
छन्द
लाड़ - दुलार का
सर्वोत्तम वन्द
कोमलता हृदय से अधिक
आवश्यकता होने पर
कठोरता
पाषाणखण्ड को
निर्मूल कर दे।
मित्रता में सामने नहीं
यदि शत्रुता
तो आसमान तक
अक्षम्य हो जाता
चंचला हिरणी सी
कष्ट अथवा हिमालय सी
पीड़ा
स्वंय सह जाती
आंचल का दूध हो
रक्त का कण कण
अब और क्या दूं कहकर
बलिदान
सर्वस्व निः स्वार्थ
निःसंकोच लुटाती
स्वंय गीले बिस्तर पर
उसे सूखे पर सुलाती
क्षणिक कष्ट हो जाए
रातदिन एक कर जाती
थप-थपाती,दुलारती,पुचकारती
अपना सर्वस्व लुटाती
यह और कोई न
संसार में सर्वोत्तम
धरा से धैर्यवान
सन्तान के लिए
अपने हृदय के
टुकड़े के लिए
मां ! जी हां मां !!
ममतामयी मां !!!
2 वर्ष पहले
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Milan Thakur

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