विज्ञापन

बात नदी की

Shashank Misra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कौन सिखाता है
        
                                                    
                            
बहना नदी को
बहकर
निरन्तर चलते जाना
पहाड़ हो
मैदान
पठार या रेगिस्तान
बहते जाना
बिना थके रुके
मिट्टी या चट्टान
छोटे बड़े असंख्य
अवरोधों से लड़ते जाना,
सफलता का मंत्र
अपने कर्म की
निरन्तरता व
अदम्य साहस
मित्रों
पहुंचाता न
उसे उसकी
मंजिल पर
मिला न देता
उसे उसके
उद्देश्य से
अपनी अग्रजा
अथवा
सागर
महासागर से।
6 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nidhhi Mukesh

22 कविताएं

View Profile

Sarthak Piyush

28 कविताएं

View Profile