कौन सिखाता है
बहना नदी को
बहकर
निरन्तर चलते जाना
पहाड़ हो
मैदान
पठार या रेगिस्तान
बहते जाना
बिना थके रुके
मिट्टी या चट्टान
छोटे बड़े असंख्य
अवरोधों से लड़ते जाना,
सफलता का मंत्र
अपने कर्म की
निरन्तरता व
अदम्य साहस
मित्रों
पहुंचाता न
उसे उसकी
मंजिल पर
मिला न देता
उसे उसके
उद्देश्य से
अपनी अग्रजा
अथवा
सागर
महासागर से।