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मेरा प्रिय स्कूल

Sharad yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बचपन में दाखिला ले लिया
        
                                                    
                            
पढ़ाई को दिल दे दिया
मन से हम पढ़ा करते थे
दोस्तो से अपने झगड़ा करते थे
कुछ सखियां आपस में लड़ती थी
किताबें भी हमसे पढ़ती थी
गुरु का करते थे, दिल से सम्मान
हम सब समझे ,उनको अपना भगवान
देख के हमको, गुरु के चेहरे खिल जाते थे
पहुंच स्कूल,हम सब मिल जाते थे
वो प्यारे से दिन बहुत भाते हैं
आज गुरु, शिष्य सब याद आते हैं
एक वर्ष पहले
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kamlesh ranjan

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