विज्ञापन

श्याम! मेरे साँवरे, मनमोहन मुरारी : माधुर्य–भक्तिपरक कृष्ण-भजन

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            श्याम! मेरे साँवरे, मनमोहन मुरारी,
        
                                                    
                            
तेरे बिन सूनी लागे दुनिया हमारी।
राधे के प्यारे, नंदलाल दुलारे,
चरणों में रख ले नैया हमारी॥

मोर-मुकुट सिर सोहे, अधरों पे मुरली,
मुरली की तान लगे प्राणों से प्यारी।
नयनों में नील गगन, मुख चंदा उजियारा,
दर्शन को तरसे अँखियाँ हमारी॥

यमुना की लहरों में तेरी ही छवि है,
वृंदावन की धूल भी लागे अति प्यारी।
कदंब तले बैठो, मनमोहन मोरे,
साँसों में बस जाए छवि तुम्हारी॥

माखन के चोर कहें, मन के भी चोर हो,
चुरा लो मेरे मन की माया सारी।
अहंकार मिटा दो, मोह-तम हटा दो,
अंतर में जला दो ज्योति तुम्हारी॥

दुख में तू सहारा, सुख में तू हमारा,
तू ही जीवन-नैया, तू ही खेवनहारा।
जग ने जब छोड़ा, तूने गले लगाया,
तू ही तो है दीनों का, तूने पार उतारा॥

न धन माँगूँ तुमसे, न यश की अभिलाषा,
बस चरण-रज दे दो, हे गिरधारी।
अंतिम साँस निकले तेरे नाम के संग,
हो अधरों पर “राधे-कृष्ण” की फुलवारी॥

श्याम! मेरे साँवरे, मनमोहन मुरारी,
तेरे बिन सूनी लागे दुनिया हमारी।
राधे के प्यारे, नंदलाल दुलारे,
चरणों में रख ले नैया हमारी॥

हे नंदलाला! हे राधे-दुलारे!
मन-मंदिर में आओ बिहारी।
जन्म-जन्म की बस इतनी विनती—
छूटे न चरणों से प्रीति हमारी॥

राधे-कृष्ण! राधे-कृष्ण!
राधे-कृष्ण! कृष्ण मुरारी!
- सनातन मुकुंद
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile