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सावन के झूले पड़े : दादरा-लय पूर्वांचली कजरी

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ।
        
                                                    
                            
भींजत मोरी अँखिया, तुम चले आओ॥

घिरि-घिरि आए बदरिया, चमके बिजुरिया।
रिमझिम बूँदा बरसे, भींजे लाल चुनरिया॥

अमवा की डारिया, पड़ल झुलनवा।
तोहरे बिना सूना लागे, मोरा अँगनवा॥

पुरवइया डोले, महके फुलवरिया।
तोरे बिन तरसे मनवा, ओ साँवरिया॥

कदंब तले सखियन गावे, मीठी कजरिया।
तोरे बिन तरसे अँखिया, सूनी अटरिया॥

सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ।
भींजत मोरी अँखिया, तुम चले आओ॥
- सनातन मुकुंद
एक महीने पहले
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