विज्ञापन

नियति : प्रतीकात्मक दार्शनिक गीतिका

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काल-बेल पर झूले जीवन-पात।
        
                                                    
                            
मौन दिशाएँ बुनतीं अदृश्य गात।

बीज सँजोए वन का गुप्त विधान।
रेत लिखे जल पर अमिट प्रमाण।

दीप जले जब थक जाए तूफ़ान।
छाया बोले धूप का गूढ़ गान।

नभ के पत्र पढ़े निश्चल विहान।
शून्य रचे प्रतिपल सृष्टि-विधान।

पग-पग चलती अनदेखी प्रज्ञा।
नियति मुसकाए—मौन उपासना॥
- सनातन मुकुंद
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile