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मुंशी प्रेमचंद जयंती : अवदान-प्रशस्ति-गीत

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कलम बनी जब सत्य-व्रत, जग में जागा नव अभियान।
        
                                                    
                            
प्रेमचंद ने शब्द-दीप से, आलोकित कर दिया जहान॥

पीड़ित जन की मौन व्यथा को, दी वाणी का सम्मान।
मानवता के पावन पथ पर, गूँजा उनका यशोगान॥

होरी, धनिया, घीसू-माधव, जन-मन की पहचान।
जीवन के कटु संघर्षों में, जगता रहा स्वाभिमान॥

शोषित जन की करुण कथा को, दिया अमर वरदान।
सत्य-सुगंधित लेखनी ने, जीता जन-मन औ' प्राण॥

हिन्दी का गौरव बढ़ाया, लाया नवयुग का विहान।
सरल शब्द में गूँज उठा था, संस्कृति का गुणगान॥

अन्यायों से डटकर बोले, रचते नव प्रतिमान।
साहित्यिक तप से सींचा, भारत का सम्मान॥

युग-युग अमर रहेगा, उनका यह दिव्य अवदान।
जन-जन के अंतर्मन में है, उनका चिर सम्मान॥

मुंशी प्रेमचंद जी की पुण्य जयंती, देती पावन ज्ञान।
सत्य, करुणा और मानवता—उनका अमर प्रमाण॥

आओ मिलकर शीश नवाएँ, करें हृदय से गान।
प्रेमचंद की अमर धरोहर, भारत का अभिमान॥
- सनातन मुकुंद
6 घंटे पहले
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