जय गिरिराजनंदिनि, अम्बे भवानी,
जय शिवप्रिया, जगकल्याणी।
वृषभवाहिनी, त्रिशूलधारिणी,
करुणामयी माँ, संकटहारिणी॥
जय शैलपुत्री, जय जगदम्बे,
जय जय हे सुखधाम।
भक्ति-ज्योति हृदय में जगा दो,
शत-शत तुम्हें प्रणाम॥
हिमगिरि की तुम दिव्य दुलारी,
शिवशक्ति, जगत्-हितकारी।
वृषभवाहिनी, दिव्य स्वरूपा,
महिमा तेरी मंगलकारी॥
जय शैलपुत्री, जय जगदम्बे,
जय जय हे सुखधाम।
भक्ति-ज्योति हृदय में जगा दो,
शत-शत तुम्हें प्रणाम॥
नवदुर्गा में प्रथम विराजो,
भक्तजनों के काज सँवारो।
मन-मंदिर में ज्योति जगा दो,
भवसागर से पार उतारो॥
मोह-मलिनता दूर भगाओ,
सद्बुद्धि का दीप जलाओ।
चरण-कमल में प्रीति बढ़ाकर,
माँ! अपना आशीष बरसाओ॥
जय शैलपुत्री, जय जगदम्बे,
जय जय हे सुखधाम।
भक्ति-ज्योति हृदय में जगा दो,
शत-शत तुम्हें प्रणाम॥
हे गिरिजे! स्वीकारो वंदन,
पावन कर दो तन और मन।
तेरी कृपा बनी रहे माँ,
तुमको समर्पित तन-मन-धन॥
जय शैलपुत्री, जय जगदम्बे,
जय जय हे सुखधाम।
भक्ति-ज्योति हृदय में जगा दो,
शत-शत तुम्हें प्रणाम॥
- सनातन मुकुंद