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जय शैलपुत्री माता : राग : दुर्गा | ताल : दादरा

                
                                                         
                            जय गिरिराजनंदिनि, अम्बे भवानी,
                                                                 
                            
जय शिवप्रिया, जगकल्याणी।
वृषभवाहिनी, त्रिशूलधारिणी,
करुणामयी माँ, संकटहारिणी॥

जय शैलपुत्री, जय जगदम्बे,
जय जय हे सुखधाम।
भक्ति-ज्योति हृदय में जगा दो,
शत-शत तुम्हें प्रणाम॥

हिमगिरि की तुम दिव्य दुलारी,
शिवशक्ति, जगत्-हितकारी।
वृषभवाहिनी, दिव्य स्वरूपा,
महिमा तेरी मंगलकारी॥

जय शैलपुत्री, जय जगदम्बे,
जय जय हे सुखधाम।
भक्ति-ज्योति हृदय में जगा दो,
शत-शत तुम्हें प्रणाम॥

नवदुर्गा में प्रथम विराजो,
भक्तजनों के काज सँवारो।
मन-मंदिर में ज्योति जगा दो,
भवसागर से पार उतारो॥

मोह-मलिनता दूर भगाओ,
सद्बुद्धि का दीप जलाओ।
चरण-कमल में प्रीति बढ़ाकर,
माँ! अपना आशीष बरसाओ॥

जय शैलपुत्री, जय जगदम्बे,
जय जय हे सुखधाम।
भक्ति-ज्योति हृदय में जगा दो,
शत-शत तुम्हें प्रणाम॥

हे गिरिजे! स्वीकारो वंदन,
पावन कर दो तन और मन।
तेरी कृपा बनी रहे माँ,
तुमको समर्पित तन-मन-धन॥

जय शैलपुत्री, जय जगदम्बे,
जय जय हे सुखधाम।
भक्ति-ज्योति हृदय में जगा दो,
शत-शत तुम्हें प्रणाम॥
- सनातन मुकुंद
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