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जय माँ महागौरी : भजन

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जय जय महागौरी माता,
        
                                                    
                            
जय हिमगिरि-दुलारी।
शशि-सम दिव्य रूप तुम्हारा,
शिवप्रिया सुखकारी॥

धवल चाँदनी-सी छवि दमके,
कुंद-कुसुम-सी काया।
मंद-मंद मुस्कान तुम्हारी,
मन में सुधा बरसाए॥

श्वेत कमल-सी छवि मनोहर,
तेज अलौकिक न्यारा।
निर्मलता की ज्योति जगाती,
रूप लगे अति प्यारा॥

मंगलमयी, मनभाविनी अम्बे,
शुभ्र प्रभा की धारा।
तेरी छवि से आलोकित हो,
जीवन-सकल हमारा॥

जय जय महागौरी माता,
जय हिमगिरि-दुलारी।
शशि-सम दिव्य रूप तुम्हारा,
शिवप्रिया सुखकारी॥

घोर तपस्या से माँ तुमने,
दिव्य आभा पाई।
अटल साधना, दृढ़ संकल्प से,
महिमा जग में छाई॥

आत्मशक्ति की ज्योति जले माँ,
मन का तम मिट जाए।
अंतर के सुप्त सुमन खिलें,
चेतन-कमल मुस्काए॥

कटुता के कंटक झर जाएँ,
मधुर वचन मुस्काएँ।
निष्कपट हृदयों के आँगन,
प्रेम-सुमन खिल जाएँ॥

ईर्ष्या-द्वेष मिटें मन से माँ,
मैत्री-भाव पनपें।
प्रेम-सुधा से हृदय सँवरें,
जन-जन के मन मिलें॥

जय जय महागौरी माता,
जय हिमगिरि-दुलारी।
शशि-सम दिव्य रूप तुम्हारा,
शिवप्रिया सुखकारी॥

सूने मन में आशा भर दो,
मुरझाए मुख खिल जाएँ।
विपदा-पीड़ित जन के पथ पर,
आशा-दीप जलाएँ॥

घर-आँगन में सुख-सौरभ हो,
मंगल-कलश सजें।
मानवता के पावन उपवन,
सद्भावों से महकें॥

श्रद्धा, धैर्य, विनय देना,
सद्बुद्धि का वरदान।
तेरे चरणों में अर्पित अम्बे,
तन-मन और प्राण॥

करुणामयी, कल्याणमयी माँ,
रखना मान हमारा।
जय जय महागौरी माता,
तू ही एक सहारा॥

जय जय महागौरी माता,
जय हिमगिरि-दुलारी।
शशि-सम दिव्य रूप तुम्हारा,
शिवप्रिया सुखकारी॥
- सनातन मुकुंद
5 घंटे पहले
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