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इमदाद के इस दुनिया में अब माने बदल गए

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये नसीब क्या बिगड़ा कि जमाने बदल गए
        
                                                    
                            
ख़िज़ाँ आयी तो भंवरों के तराने बदल गए
कभी इधर भी गुलज़ार थे ठहाके अपनों के
वो दिन कुछ और थे अब फ़साने बदल गए
कभी तो हम ही हम थे जिनकी धड़कनों में
अब तो उनके भी कितने ठिकाने बदल गए
कभी इधर भी धूम थी शानो शौक़त की यारो
हैसियत क्या बदली कि आवदाने बदल गए
मुश्किल सा हो गया है ये ज़िन्दगी गुज़र पाना
क्योंकि जीने के तरीक़े अब पुराने बदल गए
अब जीता है हर आदमी अपने लिए ही 'मिश्र'
इमदाद के इस दुनिया में अब माने बदल गए
-शांती स्वरूप मिश्र
एक दिन पहले
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