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चलो मोहब्बत का कोई ठिकाना ढूंढते हैं

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलो मोहब्बत का कोई, ठिकाना ढूंढते हैं
        
                                                    
                            
न मिल सके नया तो कोई, पुराना ढूंढते हैं

मुद्दत गुज़र गयी यारो मुस्कराये बिना हमें,
चलो कहीं खुशियों का कोई, तराना ढूंढते हैं

अपनों के तमाशे तो होते रहेंगे यूं ही दोस्त,
चलो उनसे मिलने का कोई, बहाना ढूंढते हैं

कहते हैं कुछ लोग कि दिल नहीं है मुझमें,
चलो अच्छे दिलों का कोई, खज़ाना ढूंढते हैं

मतलबी दुनिया में रह कर देख लिया "मिश्र",
चलो अपना पहला सा कोई, जमाना ढूंढते हैं

शांती स्वरूप मिश्र


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6 वर्ष पहले
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Anil Pandey

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