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आदत सी हो गयी है

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमको तो ग़म उठाने की, आदत सी हो गयी है
        
                                                    
                            
खुशियों से यार अब तो, नफ़रत सी हो गयी है
हम तो सहते रहे हैं उम्रभर, दुनिया की आफ़तें,
अब जीने की इस तरह, फितरत सी हो गयी है
अब जिधर देखते हैं, बस दिखती मक्कारियां,
अब हमें तो हर किसी से, दहसत सी हो गयी है
कितने ही दिखाओ आंसू, फ़र्क़ पड़ता नहीं यारो,
अब अपनों की हरकतों से, वहसत सी हो गयी है
ख़ुदा की मेहरबानियां भी, होती हैं जाने किस पे,
उससे से भी मेरी अब तो, बग़ावत सी हो गयी है
बना के रख दिया 'मिश्र'. मुझको तो खिलौना सा,
अब यूं ही बजते रहने से, हिक़ारत सी हो गयी है
-शांती स्वरूप मिश्र
2 घंटे पहले
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