विज्ञापन

गिलहरी की मौत

Shanti Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शीर्षक: गिलहरी की मौत
        
                                                    
                            

कितनी चंचलता है उसमें
भाग कर पेड़ों पर चढ़ना
पूँछ लहराते हुए इधर उधर
खेत खलिहान में दौड़ना
नन्हें नन्हें पंजों के बल पर बैठना
धरा पर बिखरे फल फूल व
भोजन सामग्री को उठाकर
आगे के पंजों में पकड़कर खाना
खुद का चेहरा सहलाना पोंछना

उसकी आँखों में भरी है
एक निश्छल चमक
भागते भागते भगाती है वह
निश्चलता को
खुद से कोसों मीलों दूर
भगवान ने बख्शी है उसको
बच्चों सी चिर चंचलता
मुस्कान और मासूमियत

मानव जाति से उसकी
गहरी निश्छल मित्रता का
प्रमाण तो नित्य ही नजर आता है
जब इंसान को देखकर
मुँह व पंजों को ऊपर नीचे करते हुए
मोहित कर देनें वाली लय ताल में
करती है वार्तालाप वो
पूँछ हिलाकर मुस्कान के साथ
अभिवादन करना तो कोई उससे सीखे
नजर नहीं आता धरती पर
इतना चंचल और जीवंत जीव अन्य कोई
पर यह चंचलता निर्मित करती है
उसमें अनिर्णय का अवगुण भी
मन होता है दुखी और उदास
सड़क पर कुचली हुई
दर्द से कराहतीं
चिक चिक चूँ चूँ करती
पूँछ हिलाती मासूम सी
गिलहरी की मौत देखकर।

मौलिक व स्वरचित।
शांतिलाल सोनी
ग्राम कोटड़ी सिमारला
तहसील श्रीमाधोपुर
जिला सीकर राजस्थान
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

416 कविताएं

View Profile

Powari Bhasha

333 कविताएं

View Profile