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जिन्दा रहना है तो लड़ो

Shambhu Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिन्दा रहना है तो लड़ो,
        
                                                    
                            
जिन्दा रहना है तो लड़ो,
सच की खातिर, हक़ की खातिर,
सभी अन्याईयों से लड़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो…
जिन्दा रहना है तो लड़ो।

विपरीत बहती धाराओं से,
गलत विचारधाराओं से,
ठोकर खाकर गिरने वाले,
टूटो मत, तुम रूको मत,
फिर से उठ आगे बढ़ो,
तुम अपने दर्द से लड़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो,
जिन्दा रहना है तो लड़ो।

न्याय के सूरज को ढँक रहे,
काले-काले बादल घनेरे हैं।
सत्य पथ में काँटे बीछ रहे,
झूठों नें बैठाए कई पहरे हैं।।
अंधियारे से बिन घबराए,
एक दिया बनकर जलो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो,
जिन्दा रहना है तो लड़ो।

सड़न भरी कुरीतियों से,
दमनकारी नीतियों से,
अन्याय-अत्याचार के समक्ष,
हिम्मत और बुलंदी से अड़ो।
डर को मन से भगाओ,
सच के संग आगे बढ़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो…
जिन्दा रहना है तो लड़ो।।

अंधियारा को मत टिकने दो।
तानाशाही के सामने सर,
अपना मत झुकने दो।
परिवर्तन का मशाल लिए,
सत्य की आवाज़ बनो।
अन्याय के समक्ष सीना तान
बेफिक्री के साथ हो खड़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो।।

लेकिन सबसे पहले तुम
अपने आप से लड़ना सीखो,
मन के भीतर बैठे डर को
हँसकर हराना सीखो।
पहले अपने आपको जीत लो,
फिर दुनिया को जीतने चलो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो…
जिन्दा रहना है तो लड़ो।

कभी मौत से मत डरो,
मौत तो अटल सच्चाई है।
जिसने जग में जन्म लिया,
उसकी निश्चित विदाई है।
लेकिन एक गांठ कर लो,
मरने से पहले तो मत मरो।
जब तक साँसें बाकी हैं,
संघर्ष करो, संघर्ष करो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो।।

जाति-धर्म के ठेकेदारों से,
नफरत के सौदागरों से,
प्रजातंत्र बिक रही,
लड़ो उन बाजारों से।
चांदी के जूते मार रहे,
उन गद्दारों से अड़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो…
जिन्दा रहना है तो लड़ो।

लोभ के टपक रहे लार में,
सत्ता के भूखे दरबारों में,
अपनी कलम बेचने वालों
चाटुकार पत्रकारों से लड़ो,
भीरू नौकरसाहों से लड़ो,
न्यायविद धृतराष्ट्रों से लड़ो,
सत्ता संपोषित दुर्योधन से
अर्जुन बन गांडिव धरो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो,
जिन्दा रहना है तो लड़ो।

और अगर डरना ही है तो, डरो..
अपने भीतर की आत्मा से,
अपने जमीर के आईने से,
अपने बुरे कर्म, स्वार्थ से डरो,
लोभ, अहंकार और ईर्ष्या से डरो।
सच की खातिर, हक़ की खातिर,
इंसानियत की खातिर लड़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो…
जिन्दा रहना है तो लड़ो…
अंधियारे से,अन्याय से,
झूठ और अत्याचारों से लड़ो।।
डरना नहीं…झुकना नहीं…रुकना नहीं…
सच की राह पर चलते रहो।
हर मुश्किल में हंसते रहो।
ले हाथ में कलम की तलवार
तुम सच की ढाल ओढ़ो।
जिन्दा रहना है तो लड़ो!
जिन्दा रहना है तो लड़ो!!
-शम्भु प्रसाद
4 घंटे पहले
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