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मेरा ख्याल

Shailesh Aggarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            थोड़ा सा जाना पहचाना लगता है
        
                                                    
                            
शायद कोई दोस्त पुराना लगता है

आसां है इस चाँद को लाना धरती पर
मुश्किल तुझको यार मनाना लगता है

दुनियाँ भर के पकवानों से भी अच्छा
मुझको माँ के हाथ का खाना लगता है

चिड़ियों ने आँगन में आना छोड़ दिया
ढूँढा है कोई और ठिकाना लगता है

हिंदू मुस्लिम छोड़,यहाँ सब शायर हैं
सब का मुझको एक घराना लगता है
-शैलेश अग्रवाल "नीर"
 
3 महीने पहले
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