विज्ञापन

अन्नू से शैलबाला

Shailbala Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक लड़की दब्बू और संकोची
        
                                                    
                            
खड़ी अकेली आंखें मीची
शहर भी छोटा
कद भी छोटा
हुई शादी तब वो खिली
पति संग आ गई दिल्ली
घर बनाया हुए बच्चे
सपने उसके थे सच्चे
मिला उसे पति का संग
सपनों में भरे उसने
रंग
अखबारों में वो लगी लिखने
सशक्त लगी अब वो दिखने
छू रही थी अब वो अंबर
केंद्रीय विद्यालय की बन गई मेंबर
भले गई वहां वो हार
पर केबीसी में गई
दो बार
दिल्ली है ऐसा दिलवाला
अन्नू से बना दिया शैलबाला
रुके जीवन को मिली गति
हर जन्म मिले यही पति।
-शैलबाला कुमारी
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all