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अन्नू से शैलबाला

                
                                                         
                            एक लड़की दब्बू और संकोची
                                                                 
                            
खड़ी अकेली आंखें मीची
शहर भी छोटा
कद भी छोटा
हुई शादी तब वो खिली
पति संग आ गई दिल्ली
घर बनाया हुए बच्चे
सपने उसके थे सच्चे
मिला उसे पति का संग
सपनों में भरे उसने
रंग
अखबारों में वो लगी लिखने
सशक्त लगी अब वो दिखने
छू रही थी अब वो अंबर
केंद्रीय विद्यालय की बन गई मेंबर
भले गई वहां वो हार
पर केबीसी में गई
दो बार
दिल्ली है ऐसा दिलवाला
अन्नू से बना दिया शैलबाला
रुके जीवन को मिली गति
हर जन्म मिले यही पति।
-शैलबाला कुमारी
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3 महीने पहले

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