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मुहब्बत का वादा

Şhahnawaz Pahat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उनसे किया इक वादा निभाना पड़ेगा,
        
                                                    
                            
उनकी डोली उठी तो मुझे दुनिया से जाना पड़ेगा।
इक दिल टूटा तो घबरा गए हो,
मुहब्बत में तो सिर भी कटाना पड़ेगा।

प्यार के तिलिस्म में ना गुमराह हो जाना,
वर्ना ज़िंदगीभर फिर पछताना पड़ेगा।
हैं किए महसूस तूने झोंके वफ़ा के,
वक़्त आ गया है अब दिल भी लुटाना पड़ेगा।

लब्बैक मौत की सदा पे कहे ना कहे,
प्यार की आवाज़ पर तुझको जाना पड़ेगा।
हैं इस जिन्दगी के ग़म बहुत थोड़े,
मुहब्बत का क़र्ज़ तो चुकाना पड़ेगा।

खंज़र जफ़ाओं के ग़र उतरें हों दिल में,
ज़हर बेवफ़ाई का तो पीना पड़ेगा।
घुमा लो कश्तियों को समुंदर से शाहिद
मज़बूरी है तूफ़ान को भी आना पड़ेगा।
-अश्क़ फ़तेहपुरी
10 घंटे पहले
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