विज्ञापन

मिट्टी से भी यारों क़ीमत कफ़न की सस्ती है

Şhahnawaz Pahat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं फरियादी हूं तेरी बेवफ़ाई का
        
                                                    
                            
बना हूँ निशाना ज़माने की रुस्वाई का
किससे करूँ शिकवा यारों मैं
दाग़ लग चुका कफ़न पे बेवफाई का

मिट्टी से भी देखो यारों कीमत कफ़न की सस्ती है
ठुकराया जिसको दुनिया ने रुखसत आज वो हस्ती है

है वीरान नगर अंजान डगर सुनसान प्यार की राहें
चला मुसाफ़िर जिस जिस पथ पर हैं मौत की क़ातिल निगाहें
जहां तेरे अरमानों की चिता जली
जहां चुभे कांटे पग में तेरे
वीरान प्यार की बस्ती है
ठुकराया जिसको दुनिया ने रुखसत आज वो हस्ती है

तूने किया जो प्यार नहीं हसीं नजरों का धोखा था
फ़ूल नहीं जो तूने दिया मौत का बस इक तोहफ़ा था
बस एक तजल्ली पाने को तेरे दीद को नज़रे तरसती हैं

ठुकराया जिसको दुनिया ने रुखसत आज वो हस्ती है

जिया हूँ तन्हा फुरकत की अंधी रातों में
नजरों से अश्क़ बहे हैं दरिया जैसे बरसातों में
ग़म तूने जो दिये उल्फ़त में मुझे
तेरी याद में आँखे बरसती हैं
मिट्टी से भी देखो यारों कीमत कफ़न की सस्ती है
ठुकराया जिसको दुनिया ने रुखसत आज वो हस्ती है
-अश्क़ फ़तेहपुरी 
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prem Chandra

2 कविताएं

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile