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मिट्टी से भी यारों क़ीमत कफ़न की सस्ती है

                
                                                         
                            मैं फरियादी हूं तेरी बेवफ़ाई का
                                                                 
                            
बना हूँ निशाना ज़माने की रुस्वाई का
किससे करूँ शिकवा यारों मैं
दाग़ लग चुका कफ़न पे बेवफाई का

मिट्टी से भी देखो यारों कीमत कफ़न की सस्ती है
ठुकराया जिसको दुनिया ने रुखसत आज वो हस्ती है

है वीरान नगर अंजान डगर सुनसान प्यार की राहें
चला मुसाफ़िर जिस जिस पथ पर हैं मौत की क़ातिल निगाहें
जहां तेरे अरमानों की चिता जली
जहां चुभे कांटे पग में तेरे
वीरान प्यार की बस्ती है
ठुकराया जिसको दुनिया ने रुखसत आज वो हस्ती है

तूने किया जो प्यार नहीं हसीं नजरों का धोखा था
फ़ूल नहीं जो तूने दिया मौत का बस इक तोहफ़ा था
बस एक तजल्ली पाने को तेरे दीद को नज़रे तरसती हैं

ठुकराया जिसको दुनिया ने रुखसत आज वो हस्ती है

जिया हूँ तन्हा फुरकत की अंधी रातों में
नजरों से अश्क़ बहे हैं दरिया जैसे बरसातों में
ग़म तूने जो दिये उल्फ़त में मुझे
तेरी याद में आँखे बरसती हैं
मिट्टी से भी देखो यारों कीमत कफ़न की सस्ती है
ठुकराया जिसको दुनिया ने रुखसत आज वो हस्ती है
-अश्क़ फ़तेहपुरी 
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46 मिनट पहले

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