माँ की ममता
कभी ना खत्म होने वाला अहसास है माँ,
संतान के हृदय की सदैव ही धड़कन है मां।
घबराती नहीं, ना ही कभी थकती, संतान के साथ चलती रहती,
बच्चे की एक आवाज़ पर प्रकट होती है माँ।
समय विशाल बदलता रहता रंग नित नए ,
बदलते रिश्ते, बदलते परिवेश नहीं बदलती कभी माँ।
कभी घबरा जाओ, डर जाओ तो माँ के पास चले आना,
अंधेरे में बन उजाला हर समय खड़ी संग माँ।
माँ की ममता को कभी कोई खरीद नहीं पाया,
हर धन में सबसे धनी, रिश्तों में सबसे बड़ी है माँ।
माँ एक अगरबत्ती जिसकी खूशबू से महकता घर परिवार ,
उनसे पूछो हृदय की पीड़ा जिनके पास नहीं है माँ।
संतान को भोजन देती, बेशक खुद भूखी रहती,
शिशु को सूखे पर सुलाती, खुद गीले में सोती माँ।
अम्मा, अम्मी, मम्मा, मम्मी, आई, मौम हज़ारों नाम,
कुछ भी कहो कुछ भी पुकारो ममता की मूरत है माँ।
नदी नहीं पीती जल अपना औरों को जल देती है,
नहीं जीती अपने लिए, निराशा में आशा की किरण है माँ।
ईश्वर को नहीं देखा किसी ने नाम लेकर करते हैं याद,
धरती पर परमात्मा का दूसरा रूप होती है माँ।
-शाहाना परवीन'शान