नहीं चाहिए किसी की झूठी हमदर्दी,
सच से मिला अपमान भी मंज़ूर है।
क्योंकि झूठी तसल्ली से बेहतर,
कड़वा सत्य भरपूर है।
-शाहाना परवीन 'शान'