देखना फिर एक दिन ये मोजज़ा हो जायेगा
रास्तों का ना ख़ुदा ही फिर ख़ुदा हो जाएगा
मस्लेहत के रंग अक्सर यूं बदलते हैं मिज़ाज
रहज़नों का क़ाफ़िला ही रहनुमा हो जाएगा
मुस्कुरा दो मुस्कुराना ही फ़क़त है इक इलाज
ज़िन्दगी उम्मीद है ये आसरा हो जाएगा
तुम जलाओ तो सही एक राह में रोशन च़राग़
रोशनी को देखकर फिर क़ाफ़िला हो जाएगा
-शहाब उद्दीन शाह