चांद नज़र आ गया, चांद नज़र आ गया
चांद नज़र आ गया,आसमां पे छा गया
आसमां पे छा गया ,आसमां पे छा गया
आसमां पे छा गया,मन को मेरे भा गया
दिल से दीद हो गई दिल से दीद हो गई
दिल से दीद हो गई ,मेरी ईद हो गई
हसरतों सा चाह कर हसरतों से चाहकर
हसरतों सा चाहकर,बन दुआ समा गया
ताकते रहे जो हम,देखते रहे जो हम
देखते रहे जो हम,चांद शरमा गया
रोज़ेदार हम रहे, अश़्क बार हम रहे
ग़म ख़्वार हम रहे, ताज़गी दिला गया
रहमो करम पे फिर,रोज़े क़ज़ा पे फिर
अमल के एतबार से ए़तबार आ गया
मन की बात जानकर,अर्ज़ मेरी मानकर
जान कर मानकर चांद मुस्कुरा गया
शाह के यक़ीन को,शाह के ईमान को
शाह के यक़ीन को,और जगमगा गया
- शहाब उद्दीन शाह, क़न्नौज
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