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रोहिंग्या

shafaque rauf

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये कैसी झुनझुनियाँ बाँध दी है,
        
                                                    
                            
झुरकुट से शरीर में
हे स्वामी
झुनझुनियाँ बाँध दी है
शोर में रुदन बहुत है
परंतु है महोधर
हरतरफ
कर्ण छोटे हुए हैं
पीड़ा हुई है बीमारी
मानवता को झूमर सा रख
मस्तक पे
जो हुआ खड़ा था
कलियुग का
क्या माणवक वो था
तुम्हारा क्या है
तुम हो स्वामी
बाँट लो ना धरती हमारी
शस्त्रधर तुम हो
हमारे पास
संपिष्ट वाणी
ऐश्वर्य है सब तुम्हारा
हम तो नीचगामी
अमन का दूत
चुप है
लो जीत ही गई
तुम्हारी निहुराई
तुम्हारे आसन में
है हेम-मुद्रा
पर एक ही होगी
हमारी शवसमाधि
एकदिन
इसी मिट्टी में मिलकर
तुम्हें अंश मिट्टी का
होना ही होगा
ये काबुक है
अभी स्वर्ग तुम्हारा एकदिन
इससे निकल कर
शिथिल हाथ पैरों में
जिसे कर दी थी
कभी तुमने अग्नि के हवाले
ओ सत्ता, ओ आनंद
तुम ऐहलौकिक
उन निर्दोषों ,उन
असहाय बच्चों की भाँति
असहाय तुम्हें सोना ही होगा
और
ये शून्य दृष्टि तुम्हारी
जो छीन पाती
धीर हमारा
सभी है सरहद हमारा
और सारा वतन तुम्हारा
सभी आँकड़े कह रहे हैं
शून्य !
नृलोक,
मनुष्य लोक ,
मृत्यु लोक
आज्ञापित
आस्था बोध के परे
यद्यपि शून्य है
तो यह
केवल व्यापार है
शरवृष्टि है
जो मस्तिष्क को
खोखला कर रही है
कि जाए न कोई
मूर्च्छा से स्वचेतन की ओर!!!


-डा. शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)


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