विज्ञापन

प्रियतम की खोज

Savitri Swami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गगन में ढूंढा है तुझको,
        
                                                    
                            
पवन ने ढूंढा है तुझको।
मिला ना तू कहीं मुझको,
पाया है मुझमें ही तुझको।

गगन में होता पंछी मिलन,
पवन में रहती ठंडी सीलन।
फिर भी ढूंढ रहा क्यों इनमें,
तुझको मेरा ये पागल मन।।

नीर में ढूंढा है तुझको,
तीर पे ढूंढा है तुझको।
मिला ना तू कहीं मुझको,
पाया है मुझमें ही तुझको।।

नीर में बहती धारा है,
तीर का अजब नजारा है।
व्योम से धरती तक ढूंढा,
अब तो मन मेरा हारा है।।

सागर में ढूंढा है तुझको,
गागर में ढूंढा है तुझको।
मिला ना तू कहीं मुझको,
पाया है मुझमें ही तुझको।।

सागर में मोती पाया है,
गागर में नीर भराया है।
भर सागर को गागर में,
तू मुझमें ही समाया है।।

अपनों में ढूंढा है तुझको,
सपनों में ढूंढा है तुझको।
मिला ना तू कहीं मुझको,
पाया है मुझमें ही तुझको।।

अपनों ने मोह भरमाया है,
सपनों ने टूट रुलाया है।
तोड़ स्वार्थ के सब रिश्ते,
गुरु ने प्रियतम से मिलाया है।।
- सावित्री स्वामी 
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10476 कविताएं

View Profile

dinesh chauhan

3551 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

432 कविताएं

View Profile

Mukesh kumar

1 कविता

View Profile