विज्ञापन

निज ह्दय के भावों को अब मुझको करना व्यर्थ नही

savita shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी अपनी मर्यादा है वो बोले हम मौन रहे
        
                                                    
                            
अन्तर्मन की पीड़ा को अब उनसे कौन कहे
इर्ष्या मन ही है जो प्रगति मेें उनकी बाधक है
शब्द उनके जहरीले तीरो से ज्यादा घातक हैं
समझ सकें मुझको इतना, उनमें सामर्थ्य नही
निज ह्दय के भावों को अब मुझको करना व्यर्थ नही
प्रेम नही यदि आपस में तो हर रिश्ता बेईमानी है
उनको अपना समझते रहना सबसे बड़ी नादानी है ।
मैने यथाशक्ति सबको प्रेम और सम्मान दिया
बदले में की नफरत मुझसे सदा मेरा अपमान किया
किन्तु पीना अब अपमानों के कड़वे घूंट स्वीकार नही
तोड़ना केवल झूठे रिश्ते ,लेना कोई प्रतिकार नही
टूटे प्रीत के धागे में अब कोई गाँठ नही लगानी है
निज सम्मान ही सर्वोपरि है बस बात यही समझानी है ।।
- सविता शुक्ला
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kalu ram

38 कविताएं

View Profile

Suresh Pal

56 कविताएं

View Profile

Rajeshwari Joshi

612 कविताएं

View Profile

Prasoon Saxena

968 कविताएं

View Profile

Jagdish Prasad

531 कविताएं

View Profile

Ila Makwana

93 कविताएं

View Profile