जहां मिट गए घमंडी,लोभी धनी व बलवान
जहां भस्म है अनेको जन तन,नाम है श्मशान
लकड़ी के ढेरों पर,पड़ी है केवल बेजान काया
देख रही निगाहे बीच पड़ी,शून्य तन मन काया
अग्नि मुख में समा अंत में राख हो जाती हैं काया
सब कुछ छोड़ नए जीवन के लिए निकलती हैं साया