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फिर दिल्ली मैदान बना दो तुम

saurabh Dixit saurabh Dixit

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                            देश भक्ति की छोटी लौ को,
        
                                                    
                            
एक तूफान बना दो तुम।

देखो जनता बिखर रही फिर,
दिल्ली मैदान बना दो तुम।।

नहीं सुरक्षित बेटी है,
लूट मची है भ्रष्टों की।
इस रावण के अट्ठाहस को,
फिर वीरान बना दो तुम।।

देश भक्ति की छोटी लौ को,
एक तूफान बना दो तुम।

आज हर कोई बोल रहा,
गन्दा सा मुंह खोल रहा है।
जय-जय करते नापाक़ों की,
देश अधर में डोल रहा है।।
अपराधों की उस धरती को,
एक श्मशान बना दो तुम।।

देश भक्ति की छोटी लौ को,
एक तूफान बना दो तुम।

कहता सौरभ अन्ना जी को,
फिर ईमान जगा दो तुम।
बदल रहे है जाति, धर्म में,
फिर इन्सान बना दो तुम।।
देश भक्ति की छोटी लौ को,
एक तूफान बना दो तुम।
देखो जनता बिखर रही फिर
दिल्ली मैदान बना दो तुम।।

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