जिस शहर ने मुझे गढ़ा
जिस शहर से मैं आगे बढ़ा
जिस शहर से सपना मैं बड़ा बड़ा गढ़ा
उस शहर का नाम गोरखपुर
उस शहर को सलाम, गोरखपुर!
वह गोरखपुर विश्वविद्यालय
ज्ञान का आलय, प्रकाश का आलय
जहां से स्नातकोत्तर मैंने किया
अंग्रेजी मैं पढ़ा
संस्कृत मैं पढ़ा
भूगोल मैं पढ़ा
वह दिग्विजय नाथ महाविद्यालय
वह बड़ा शिक्षालय
जहां से मैंने एवं.टी. किया
वह शहर जिसने मुझे ज्ञान दिया
उसको प्रणाम
उसको सलाम
सुबह शाम
और आठों जाम
थे सड़क के किनारे
ढाबे ढेर सारे
मैं वहां खा लेता था
मैं मिटा अपना भूख लेता था
कैसे भूलूं मैं मैं उस शहर को
अपने प्यारे ज्ञान के नगर को
पुनः प्रणाम उस शहर को।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'