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माटी की महक

SATYENDRA KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने गांव के माटी की महक के
        
                                                    
                            
सामने शहर बेकार लगता है
अपने बागिचे के चिड़ियों की चहक के
सामने सब कुछ बेकार लगता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
17 घंटे पहले
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