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दो दिलों के बीच में

SATYENDRA KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दो दिलों के बीच में
        
                                                    
                            
गया खींच मैं
अब कहां जाऊं?
क्यों न स्वदेश से दिल लगाऊं?
और सब कुछ पाऊं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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