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वो मुनफ़रिद सी ठहरी

SATYANIDHI DWIVEDI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसने दी इजाजत
        
                                                    
                            
अपनी तम्मनाओं को
जाहिर किया मुझसे
चंद लफ़्ज़ों में मेरे
जज्बातों को सुनने की
ख्यालों में जो न थी कभी मेरे
उसके लफ़्ज़ों ने कर दिया जादू
अब खुदा की बज़्म पर
एक अर्जी मेरी भी जायेगी
वो जो पहले से ठहरी
ठंडी बयार सी अनूठी सी
मेरी भी मान लें इल्तिज़ा इतनी
मेरी नज़्मों को गुनगुनाने की
 
2 महीने पहले
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