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प्रतीक्षा

satyanarayan gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रतीक्षा
        
                                                    
                            
का अंत
कभी नहीं होता
मील के पतथर
जरूर
आते हैं
लेकिन
मंजिल दूर
बहुत दूर....
नजर आता है
पथिक
चलता रहता है
न चाहते हुए भी
चलते रहना पडता है
कभी दौड़ते हुए
कभी उछलते हुए
कभी घसीटते हुए.
2 महीने पहले
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