{इस कविता में कोरोना संक्रमण काल में लाकडाउन के दौरान भारत के गरीब तपके के मजदूरों की दुर्दशा का वर्णन है जो सम्पन्न समाज के व्यक्ति, मीडिया तथा सरकार से सवाल कर रहा है... }
बस दे दो जबाब एक सवाल का...
कोई दे दो जबाब मेरे भी सवाल का...
गरीबी के मारे थे समाज के वेचारे थे |
निरक्षर हम सारे थे मजदूरी के सहारे थे ||
रोटी हो परिवार के पास में यही मजबूरी कहर ढाए |
चार पैसों की तलाश में हम गाँव से शहर आए ||
एकदिन मुरहुआ कहा शोखन चाचा वो रिक्सवा पे दू ठो सवारी है |
ऊ बतियावत है कि, कि, कि.... किरऊना नाम की कउनो बिमारी है ||
चाचा बोले बक बुड़बक उसका नाम कोरोना है |
बिलायती बिमारी का एक मनई से दूजे में होना है ||
देश में अपने मरीज नही हैं उस जंजाल का...
बस दे दो जबाब एक सवाल का...
चाचा दे दो जबाब मेरे भी सवाल का...[1]
महीनों बाद दुकान पर चाय पी रहे थे |
वहीं पर एक भैया बैठे पेपर पढ़ रहे थे ||
अखबार पढ़ समाचार सबको सुना गए |
लो जी कोरोना वाले भारत भी आ गए ||
हो रही है एयरपोर्ट पर यात्रियों की जाँच बता रहे थे |
कुछ आइसोलेशन, क्वारंटिन जैसी बात बता रहे थे ||
पर डरने की कोई बात नहीं यहाँ की सरकार फुल तैयारी में है |
हमारी व्यवस्था से लड़ सके इतनी क्षमता कहाँ इस बिमारी में है ||
फिर बेकार में चिन्ता क्यों करे इस जवाल का...
बस दे दो जबाब एक सवाल का...
भैया दे दो जबाब मेरे भी सवाल का...[2]
एक-एक कर भारत में भी कोरोना की कई केस हो गई थी |
धीरे-धीरे अब इसकी चर्चा हर शहर गली में तेज हो गई थी ||
फिर एक दिन इसे रोकने स्वयं प्रधानमंत्री जी ठान आए |
पहले 1 दिन,फिर 21 दिन, लाकडाउन का फरमान लाए ||
टेलीविजन पर सरकार की नितियों को दिखा रहा था |
अब कोरोना हारेगा T.V. वाला जोर-2 से बता रहा था ||
मगर तीसरे दिन हम लोग पैदल गाँव की ओर निकल पड़े |
हमारे लिए 1 दिन ही भारी था, 21 दिन भला कैसे अड़े ||
क्या सरकार को पता नहीं था मजदूरों के हाल का...
बस दे दो जबाब एक सवाल का...
हे राजन् दे दो जबाब मेरे भी सवाल का...[3]
चालीस कोश चले हैं अभी हफ्तों से भूखे सूख गए |
आगे चार सौ जाना है पैरों के चप्पल भी अब टूट गए ||
कभी धूप में अपने छतपर चलके तुम भी नंगे पांव को सेको ना |
कितना आसान है हाईवे पर चलना ये कल्पना करके देखो ना ||
ओ देखो! सर पर बोरा पीठ पर झोरा गोदी में लाल लिए पत्नी आ रही है |
पति के कंधे पर है बूढ़ी माँ नन्ही बिटिया तुलबुल- तुलबुल चली जा रही है ||
मिल जाता है कहीं, कोई फरिश्ता भगवान का |
दे जाता है कुछ दाल-रोटी, नाश्ता पकवान का ||
धन्यवाद, जिसने चिंता की हमारे ख्याल का...
बस दे दो जबाब एक सवाल का...
ओ फरिश्ते! दे दो जबाब मेरे भी सवाल का...[4]
40 दिनों के बाद नजर गांव की कोठियां आयीं हैं |
रोटी से ज्यादा हमने पुलिस की लाठियां खायीं है ||
हां मिले थे वर्दी वाले कुछ साहब भी दिलदार |
लाठी के बजाय खाना दिया,दिए पैसा भी हजार ||
अरे कांप उठता है कलेजा उस दिन के मंजर को सोचकर |
चला जाता था जब कोई अपनों को मझधार में छोड़कर ||
शहर से गाँव की ओर चले हम कई परिंदा थे |
कुछ मारे गए एक्सीडेंट में शेष अभी जिंदा थे ||
कौन जिम्मेदार है मजदूरों के हलाल का...
बस दे दो जवाब एक सवाल का...
सर जी दे दो जवाब मेरे भी सवाल का...[5]
सुरक्षा के चलते हम लोग 14 दिन क्वारंटिन हुए थे |
हमारे आने से पहले गाँव में पॉज़िटिव तीन हुए थे ||
TV वाला यहाँ गांव में भी वैसे ही चिल्ला रहा था |
कोई सरकार की आर्थिक योजनाएं बता रहा था ||
अब उस नीति को नहीं बताता जो हमको रुला गयी |
कोरोना फेल करने वाली कैसे कोरोना फैला गयी ||
वैसे रोग था ये चीन के वुहान का |
हम लोग था बिहार के सिवान का ||
फिर हिस्सा कैसे बने इस बवाल का...
बस दे दो जबाब एक सवाल का...
ओ एंकर बाबू, दे दो जबाब मेरे भी सवाल का...[6]
सुना है अब कुछ यातायात भी खुल गया है |
अल्प उद्योगों का कामकाज भी खुल गया है ||
धन नहीं बचा अब सरकार के खजाने में |
क्या कोरोना नहीं फैलता शराब के मयखाने में ||
जिसने जमाती बताकर पूरे कौम को बदनाम किया |
उनसे पूछो क्यों शराबियों को इकट्ठा खुलेआम किया ||
नर्स, डॉक्टर सुरक्षा की फरियाद कर रहे हैं |
उनपर हेलीकॉप्टर से फूलों की बरसात कर रहें हैं ||
अरे पहले व्यवस्था तो करो उनके ढाल का...
बस दे दो जबाब एक सवाल का...
जनाब दे दो जबाब मेरे भी सवाल का...[7]
काश! विदेशों की उड़ाने पहले बंद की गयी होती |
शायद भारत की रफ्तार आज भी कम नहीं होती ||
ठीक है तालाबंदी हुई लेकिन फिर उसे खोला क्यों गया |
खोलना ही था तो हमें मरने को रोड पे छोड़ा क्यों गया ||
अब तो कोविड की संख्या लाखों के पार भई |
शहर से भागे तो गाँव में भी आकर मार गई ||
आज करोड़ों की आबादी भूखमरी से लड़ रही है |
ये अमीरों की बिमारी हम गरीबों पे भारी पड़ रही है ||
दिल में रहा यही हुबार मलाल का...
बस दे दो जबाब एक सवाल का...
ओ साहब,दे दो जबाब मेरे भी सवाल का...[8]
दिनांक:-18 May 2020
---- सतीश यादव
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